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[jcnc] JCNC Sunday Adult Swadhyaya continuing on November 15, 10AM via ZOOM

posted Nov 12, 2020, 11:35 PM by JCNC Technology


722 S. Main St, Milpitas CA

JCNC Bhavan and Temple is closed until further notice

Live Darshan 24/7 here 


Jai Jinendra,

 

We trust you and your loved ones are safe during this challenging pandemic.

 

As you all know, the JCNC Sunday Adult Swadhyaya usually conducted on the 2nd floor in Sthanak/Bhakti Area is continuing Zoom Video Conference from 10 to 11:15 AM on the coming Sunday, November 15th, and every 1st, 3rd and 5th Sunday of every month consistent with Senior Jaina Shala 2020-21 Schedule. 

 

Brief Description of Swadhyaya Topic:

 

हमारे स्वाध्याय का विषय आचार्य हरिभद्रसूरी रचित "योगदृष्टि समुच्चय" है।  उनकी रचनाओंमेंयोगदृष्टि समुच्चयजैनयोग का अन्यन्त महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है। यह ग्रन्थ संस्कृत में है और उसमे २२८ श्लोक है। आचार्य हरिभद्र ने आत्मा के विकास-क्रम को योग पद्धति पर एक नए रूप में विश्लेषित किया है। इस ग्रन्थ में मित्रा, तारा, बला, दीप्रा, स्थिरा, कान्ता, प्रभा और परा  - इन आठयोगदृष्टिओं का विस्तृत वर्णन है।  इसमें योग-साधकों के उपकार हेतु उन्होंने इच्छायोग, शास्त्रयोगऔर सामर्थ्ययोग स्वरूप व्यक्त किया है और अंत में योग के अधिकारी के रूप में गोत्रयोगी, कुलयोगी, प्रवृत्तचक्रयोगी और सिद्धयोगी - इन चार योगियों का वर्णन किया है।  आचार्यहरिभद्र ने इस ग्रन्थ पर १०० पद्य प्रमाण वृति लिखी है जो ११७५ श्लोक परिमाण है।

 

The pdf file of the last swadhyaya (11/1/2020) on Yogdrashti Samuchchay can be accessed via the following link:

https://drive.google.com/file/d/17F0bFvtxog-_0dSsPkYZZM1vHFN9GlwS/view?usp=sharing

 

Zoom Conference Call Information:

Topic: JCNC Swadhyaya

Time: Nov 15, 2020 10:00 AM Pacific Time (US and Canada)

        Every 2 weeks on Sun,

        Nov 15, 2020 10:00 AM

        Nov 29, 2020 10:00 AM

 

Join Zoom Meeting

https://zoom.us/j/99061942082?pwd=MDIvOWV2dEZuYU1HRngyMk03UWFKdz09

 

Meeting ID: 990 6194 2082

Passcode: 408510

 

Be safe, and please take extra measures of protection. 

 

Best regards & Pranaam,

Harendra Shah

Kamlesh Mehta

Cell: (408) 839-8996

श्री बृहत्कल्पभाष्य में कहा है: “नवि अत्थि  वि  होहीसज्झाय समं तवो कम्मंअर्थात "स्वाध्याय के समान दूसरा तप  अतीत में था कोई वर्तमान में है और  भविष्य में होगा। "

तप के बाह्य (और अभ्यन्तर (भेद है और "स्वाध्यायअभ्यन्तर तप है।

"ज्ञानक्रियाभ्याममोक्षःअर्थात "ज्ञान और क्रिया (आचरणके सम्यग संयोग से मोक्ष प्राप्ति है।"

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